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पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा

प्राथमिक पशु चिकित्सा का उद्देश्य दुर्घटनाग्रस्त पशु की कुशलतापूर्वक सहायता करना है जिससे उसका दर्द कम हो और पशु चिकित्सक के आने तक उसकी दशा और ख़राब न हो। कभी – कभी पशु पशु अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं जिससे अत्यधिक खून निकला, जख्म होना, हड्डी का टूटना एवं फफोले आदि का पड़ जाना आम बात होती है। इनकी प्राथमिक चिकित्सा करने पर पशु को तात्कालिक राहत मिलती है तथा पशु चिकित्सक के आने तक उनकी दशा अधिक ख़राब नहीं होती है।

प्राथमिक पशु चिकित्सा के लिए आवश्यक वस्तुयें

  1. स्वच्छ रूई, पट्टियाँ, सर्जिकल गाज, पुरानी सूती धोती या चादर
  2. रबर की नालियां या मजबूत पतली रस्सी
  3. सर्जिकल कैंचियाँ (सभी आकार की)
  4. चिमटी
  5. थर्मामीटर (दो अदद)
  6. टैनिक अम्ल (जो विष तथा जलने के लिए प्रयोग किया जाता है।)
  7. गुड़ या राब
  8. जई चूर्ण।
  9. मोटी रस्सियाँ (कष्ट प्रसव के लिए)
  10. ट्रोकार (शूची – श्लाका) एवं कैन्यूला (प्रवेशिनी)
  11. चाकू (2 अदद)
  12. दवाएं

प्राथमिक पशु चिकित्सा में प्रयोग की जाने वाली साधारण दवाइयां

  1. अरंडी का तेल
  2. कार्बोलिक एसिड
  3. कपूर
  4. फिटकरी
  5. सरसों का तेल
  6. मैग्नीशियम सल्फेट
  7. पोटेशियम परमैंगनेट
  8. अल्कोहल (शराब)
  9. टिंचर आयोडीन
  10. कत्था व खड़िया
  11. फिलायल
  12. लाइसोल
  13. निलाथोथा (तूतिया)
  14. तारपीन का तेल
  15. कलमी शोरा

प्राथमिक उपचार विधि

घाव या जख्म

कारण – किसी धारधार हथियार को लगने या दुर्घटना होने से शरीर की खाल, खून की नली या कोशिकाओं का कट या फट जाना।

लक्षण – 1. खाल काटना, 2. मांस पेशियों का कटना तथा 3. खून बहना

प्राथमिक उपचार – सर्वप्रथम प्रभावित अंग में पट्टी बांधकर खून को बंद करना चाहिए। घाव को साफ कर टिंचर बेन्जाइन का फाहा रखकर पट्टी कर देना चाहिए। यदि खून नहीं निकल रहा हा तो घाव को पोटाश के पानी से साफ़ कर जिंक मलहम या लोरीक्जीन क्रीम या सेल्फानिलेमाइट चूर्ण (पाउडर) लगाकर पट्टी बांधना चाहिए।

खरोंच लगना

प्राथमिक उपचार – खरोंच लगे स्थान को पोटाश के पानी से साफ कर टिंचर आयोडीन लगा देना चाहिए। इसमें पट्टी नहीं  चाहिए।

पुराना घाव

लक्षण – 1) घाव में पपड़ी पड़ना 2) घाव से दुर्गंध आना 3) घाव में  मवाद पड़ना अथवा कीड़े पड़ जाना।

प्राथमिक उपचार – घाव को पोटाश के पानी से अच्छी तरह साफ करना चाहिए। सफाई के बाद जिंक, नीम, लोरेक्जिन मलहम या एक्रीफ्लोबिन अथवा टिंचर आयोडीन लगाकर पट्टी बांधना चाहिए। जख्म में यदि सूजन है तो आयोडीन मलहम लगाना चाहिए।

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